अभी हाल ही में बनी नई-नवेली सरकार से जनता को यह उम्मीद नहीं थी कि ये भी वही गैर जरूरी और जनता की गैर हितैसी काम करेंगे जो इसके पूर्ववर्ती सरकार ने किये थे। गैर जरुरी कार्य जैसे राज्यपालों को बिना वजह हटाना और गैर हितैसी कार्य जैसे महगाई में बढ़ोत्तरी, रेल किराया में बढ़ोत्तरी, विदेशी पूजीपतियों को उद्योग के लिए शरण देना …… आदि आदि। देश को उम्मीद थी की सुशासन आयेगा तो देश की सरकारी मशीनरी नियमित काम करना शुरू कर देगी। लेकिन सरकार के एक महीना बीतने के बाद भी कोई बड़ा परिवर्तन देखने को नहीं मिला। आज भी ट्रेनों के आवागमन का वही हाल है जैसे की पहले थी। हाल ही में मैं इलाहाबाद से अहमदाबाद का सफर किया था। मैं जिस ट्रेन से आया उसके पहुँचने का समय शाम के 7.10 पर था लेकिन वह 8.20 घंटे की देरी से 3.30 पर पहुंची। आज कल ट्रेनों के लेट होने का कोई प्राकृतिक कारन भी नहीं है जैसे घना कुहरा या अन्य समस्या। इसे लेट होने के लिए सिर्फ सरकारी मशीनरी जिम्मेदार है। इसके अलावा रेल से जुडी एक और समस्या जो लम्बी दुरी के लिए भी सामान्य श्रेणी में यात्रा करते है (चाहे पैसा के अभाव में या टिकट न ले पाने की वजह से) उनको डायरेक्ट प्रभावित करती है। स्टेशन पर पुलिस की मिली-भगत से कुलियों द्वारा सीट देने के नाम पर जबरदस्ती वसूली। ये समस्या मुझे दिल्ली और अहमदाबाद में कुछ ज्यादा दिखी। दिखाने के लिए तो यहाँ कैमरा से रेकार्डिंग होती है लेकिन ये महज दिखावा ही सिद्ध होता है। सरकार को चाहिए की सरकारी मशीनरी के ऊपर लगाम लगाये की इस प्रकार की समस्याएं जल्दी दूर हो जिससे लोगो को राहत मिले। अगर वर्तमान सरकार भी पूर्ववर्ती सरकार की तरह महगाई बढ़ाते रही और विदेशी निवेश को बढ़ाई तो ये जनता है सोया हुआ शेर। जिस दिन जागेगी तख्ता पलट कर देगी वे पांच साल का इंतजार नहीं करेगी।
रघु अपना