मुझे लगता है जवाहर लाल नेहरू और नरेंद्र मोदी के आर्थिक विचारों के बीच कोई भिन्नता नहीं है क्योकि दोनों भारी औद्योगीकरण के पक्ष में हैं. दोनों विदेशी तकनीकी के पक्ष में है। कुछ समय पहले गुजरात में जब नरेंद्र मोदी जी चुनावी सभा सम्बोधित कर रहे थे तो वे नेहरू जी पर कटाक्ष करते हुए कहे थे की इस देश के पहले पी एम सरदार पटेल जी होते तो देश की दिशा कुछ अलग होती। शायद उनका इसारा विदेशी बड़े उद्योग की जगह देशी छोटे उद्योगो की तरफ था। इस तथ्य से मैं सहमत भी था की सरदार पटेल जी गरीबो को ध्यान में रख कर नीतिया बनाते। वे आर्थिक ग्रोथ पर जोर न देकर आर्थिक विकास पर ज्यादा ध्यान देते। ऐसे भाषणो से मोदी जी ने लोगो को लुभाया तो जरूर लेकिन कर क्या रहे है ? किसके पद चिंन्हो पर चल रहे है नेहरू जी के या सरदार पटेल जी के। शायद नेहरू जी के। कहा गया पटेल जी का आर्थिक सिद्धांत ? मोदी जी आप चाहे जितना विदेशियो को निवेश के लिए बुला लीजिये, चाहे जितना भारी उद्यमों को बढ़ावा दीजिये। उससे आप ग्रोथ भले ही कर लेंगे लेकिन विकास नहीं कर पाएंगे। इसका परिणाम होगा सापेक्ष गरीबी बढ़ेगी, असमानता बढेगी, लोगो में असंतोष बढ़ेगा। आपके द्वारा लागु की जा रही नीतियों से एक गाव का एक आदमी तो हवाई जहाज से चलेगा लेकिन पूरा गाव रोज की दो वक्त की रोटी जुटाने में पूरी जिंदगी गुजार देगा वो और कुछ नहीं कर पायेगा। इसलिए आप ग्रोथ की जगह समावेशी विकास पर ध्यान दीजिये जिससे सवा सौ करोड़ जनता का भला हो सके। सबका साथ सबका विकास केवल नारा मत दीजिये उसे धरातल पर उतारिये।
