Wednesday, 9 September 2015

"आजमगढ़ में विश्वविद्यालय बनाओ अभियान"

साथियों, मैं आजमगढ़ प्रशासन से यह सूचना माँगा था कि आजमगढ़ में कितने सरकारी, अर्ध सरकारी और प्राइवेट डिग्री कालेज है और उसमे प्रवेशार्थियों की संख्या कितनी है? मुझे अभी तक सिर्फ आजमगढ़ में सरकारी, अर्ध सरकारी और प्राइवेट डिग्री कालेज के आकड़े ही मिले है। प्राप्त आकड़ो के अनुसार 1 (एक) सरकारी, 10 (दस) अर्ध सरकारी और 128 (एक सौ अट्ठाइस) प्राइवेट डिग्री कालेज हैं। अर्थात आजमगढ़ में कुल 139 डिग्री कालेज हैं। ज्ञात हो कि वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल यूनिवर्सिटी जौनपुर के वेब साईट पर आजमगढ़ में कुल डिग्री कालेजों की संख्या 154 है। फ़िलहाल सच्चाई जो भी हो आप ये समझ सकते है कि आजमगढ़ की वर्तमान जनसँख्या लगभग 46 लाख से ज्यादा है। (जनगड़ना 2011 के अनुसार) और वहा एक भी यूनिवर्सिटी नहीं है। जबकि इसकी मांग वर्षों से हो रही है। आजमगढ़ में यूनिवर्सिटी को राजनैतिक मुद्दा के रूप में भी प्रयोग किया जाता है लेकिन वो महज भाषणों तक ही सिमित रहता है, प्रैक्टिकल का हिस्सा अभी तक नहीं हुआ है। वेहद दुख होता है जब कुछ तथाकथित माननीय तर्कहीन तथ्य देते हुए इस मांग को नकार देते है और कहते है कि आजमगढ़ में यूनिवर्सिटी की क्या जरुरत है? जब उसके पडोसी जनपद जौनपुर में यूनिवर्सिटी है, फैजाबाद में यूनिवर्सिटी है, गोरखपुर में यूनिवर्सिटी है, बनारस (वाराणसी) में यूनिवर्सिटी है। आजमगढ़ से डेढ़ सौ किलोमीटर दूर इलाहाबाद में यूनिवर्सिटी है। तो फिर आजमगढ़ में यूनिवर्सिटी की क्या जरुरत है? प्यारे तथाकथित माननीयों मैं तुमसे पूछ रहा हूँ। अगर जौनपुर की जनसँख्या 44 लाख है और वहा यूनिवर्सिटी है, फैजाबाद की जनसँख्या 24 लाख है और वहा यूनिवर्सिटी है, गोरखपुर की जनसँख्या 44 लाख है और वहा यूनिवर्सिटी है, बनारस (वाराणसी) की जनसँख्या 36 लाख है और वहा तीन यूनिवर्सिटी है, इलाहाबाद की जनसँख्या 59 लाख है और वहा चार यूनिवर्सिटी है। तो मैं पूछना चाहता हूँ कि आजमगढ़ की जनसँख्या 46 लाख है तो वहा यूनिवर्सिटी क्यों नहीं होनी चाहिए? साथियों हम आजमगढ़ में यूनिवर्सिटी की मांग कर रहे है इससे न सिर्फ आजमगढ़ का, न सिर्फ पूर्वांचल का, बल्कि पुरे देश का लाभ होगा। हम अपील करते है आजमगढ़ वासियों से, पूर्वांचल वासियों से, प्रदेश वासियों से और देश वासियों से की आप "आजमगढ़ में विश्वविद्यालय बनाओ अभियान" का हिस्सा बनिये, ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों को एक ''उपहार'' दिलवाने का हिस्सा बनिए। मैं पुरे विश्वास से कह रहा हूँ कि धान, गेहूँ, गन्ना, आलू.... आदि पैदा करने वाली धरती बहुत सारे अधिकारी, इंजीनियर, डाक्टर, जज, राजनेता …. आदि पैदा करेगी।
जय हिन्द जय भारत
आपका अपना
राघवेन्द्र यादव
शोधार्थी
सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी आफ गुजरात
गृह जनपद - आजमगढ़

Friday, 4 September 2015

रामदेव एण्ड कंपनी

लीजिये हाज़िर है रामदेव एण्ड  कंपनी  की  नूडल्‍स। अब ये मैगी भी बेचेंगे। मैं ये जानने में असमर्थ हूँ की क्या ये स्वराज फ़ूड के दायरे में आता है या नहीं ? खैर   जो  भी  हो   ये  बात  समझ  में आ ही गई होगी की नेस्‍ले की मैगी पर बैन क्यों  लगी। हाल-फ़िलहाल  हमें इंतजार  है रामदेव एण्ड  कंपनी के पेप्सी-कोला आने का। 


अभी  तक  हम कार्पोरेट से बच रहे  थे  अब  निओ  कार्पोरेट  से  भी  बचना    है .