आज कश्मीर में पत्थर फेंकने को लेकर गजब की भक्ति दिखाई जा रही है। क्या यह पहली बार हो रहा है? क्या ऐसा सिर्फ कश्मीर में ही होता है? कश्मीर को छोड़कर पुरे भारत में कही नहीं होता है? अगर होता है तो उस पर इतना राजनितिक नौटंकी करने के जगह समाधान पर ध्यान देना चाहिए कि उनको ऐसा न करना पड़े। मेरा अनुभव है कि भारत का शायद कोई भी ऐसा राज्य नहीं है जहां कर्फ्यू लगे और पुलिस के ऊपर पत्थर न फेंका गया हो। खैर ये तो बड़े मुद्दे पर होता है। इसे छोडिए। आइए हम कुछ छोटे मुद्दों पर बात करते है। हम किसी भी राज्याश्रित या केंद्राश्रित विश्वविद्यालय को लेते है। वहां कुछ छात्र अपने मांग को लेकर सड़क पर आते है। फिर दोनों (छात्र और पुलिस) में झड़प होती है और छात्रों द्वारा पुलिस पर पत्थर फेंके जाते है, ठीक वैसे ही जैसे कश्मीर में चल रहा है। क्या हम इन पत्थरबाजों को आतंकवादी कहते है, जैसा की कश्मीर के लिए कहा जा रहा है? इसके आलावा, हम सभी वकीलों और पुलिस के झड़प से भी चीर-परिचित होंगे। इनके झड़प में भी पुलिस के ऊपर पत्थरबाजी होती है क्या हम उन वकीलों को आतंकवादी कहते है? शायद नहीं। हम राजनितिक पार्टियों को लेते है। सत्तासीन पार्टी को छोड़ कर, अन्य पार्टियाँ कुछ मुद्दे तलाश (ढूढ़कर) कर सड़क पर शक्ति प्रदर्शन करती है। जिसमे कई बार ऐसा होता है कि वे पुलिस से झगड़ते है और पुलिस के ऊपर पत्थर फेंकते है। शायद हम उन्हें भी आतंकवादी जैसा उच्चारण नहीं करते है। पुरे भारत में कश्मीर को छोड़कर दूसरे किसी भी राज्य के किसी भी जनपद में ऐसी पत्थरबाजी होती है तो हम उन्हें आतंकवादी नहीं कहते है। तो ये नौटंकी और टैग कश्मीर के लिए क्यों है? मेरा मानना है कि यह सब गवर्नमेंट फेल्योर के कारण है। इसके लिए कुछ राजनितिक व्यापारी जिम्मेदार है। उनके खिलाप करवाई करनी चाहिए। लेकिन दुखद की इसे आम जनता झेल रही है और कुछ नौटंकीबाज जबरदस्ती की भक्ति दिखा रहे है और कह रहे है की कश्मीरियों को गोली मार देना चाहिए। टैग और सर्टिफिकेट बांटने वाले इन चोचलेबाजों को राजनितिक नौटंकी करने के जगह समाधान पर ध्यान देना चाहिए कि उनको ऐसा न करना पड़े और कश्मीर में अमन-चैन रहे। आम कश्मीरियों को छर्रे या गोली मारने से समस्या का समाधान नहीं निकलेगा। सरकार को चाहिए की इसपर गम्भीरता से विचार करे और "स्थाई समाधान" निकाले। जिसमे आम जनता की भलाई है, हमारे देश की रक्षा करने वाले वीरों की भलाई है और हमारे देश की भलाई है।
Tuesday, 26 July 2016
Saturday, 9 July 2016
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