उत्तर
प्रदेश
सरकार
से
पूछ
रहा
हूँ
कि
ये
दोहरापन
क्यों
है?
आप
विधान
सभा
में
एरा
विश्वविद्यालय
लखनऊ,
उत्तर
प्रदेश
विधेयक,
2015 पारित
करने
के
लिए
सदन
में
कहते
है
कि
"यह
विधेयक
है
विश्वविद्यालय के
बारे
में
और
सैद्धान्तिक
रूप
से
हम
लोग
किसी
भी
नए
विश्वविद्यालय
की
स्थापना
का
कभी
भी
विरोध
नहीं
करते
है।"
अगर
नए
विश्वविद्यालय
बनाने
के
सन्दर्भ
में
वाकयी
आपके
विचार
ऐसे
है
तो
यह
सराहनीय
विचार
है
और
हम
ऐसे
विचार
का
स्वागत
करते
है।
लेकिन
यथार्थ
कुछ
और
है।
इसे
मैं
आपके
विचार
नहीं
बल्कि
कागजी
नौटंकी
मानता
हूँ।
क्योंकि
उत्तर
प्रदेश
विधान
परिषद
में
जब
आजमगढ़
में
विश्वविद्यालय
बनाये
जाने
पर
सूबे
के
मुख्यमंत्री
से
सवाल
पूछा
गया
तो
सरकार
के
मंत्री
जवाब
दिए
कि
आजमगढ़
में
विश्वविद्यालय
बनाया
जाना
प्रासंगिक
नहीं
है।
इसका मतलब है कि वे आजमगढ़ में विश्वविद्यालय बनाये जाने का विरोध कर रहे है।
सूबे
की
सरकार
का
यह
एक
मनमाना
जवाब
था,
जिसका
यथार्थ
से
कोई
लेना-देना
नहीं
था।
इस
जवाब
ने
हजारों
आजमगढ़ियों
को
आहत
किया
था।
मैं
जानना
चाहता
हूँ
कि
अगर
एक
प्राइवेट
कालेज
को
विश्वविद्यालय
बनाने
के
लिए
इतना
मधुर
और
बौद्धिक
विचार
दिए
गए
तो
आजमगढ़
में
विश्वविद्यालय
बनाने
के
लिए
इतना
निष्क्रिय
और
उलजुलूल
उत्तर
क्यों
दिया
गया?
मैं
सूबे
की
सरकार
से
पूछता
हूँ
कि
"आजमगढ़
विश्वविद्यालय
विधेयक"
कब
पारित
होगा?
