Tuesday, 27 December 2016

पटाकिया मनोरंजन और दुस्वारियां

पुणे स्थित चेस्ट रिसर्च फाउंडेशन ने अपने रिसर्च में पाया कि 1 अनार बम  34 सिगरेट के बराबर प्रदूषण फैलाता है। एक फुलझड़ी 74 सिगरेट के बराबर प्रदूषण फैलाती है। 1 पुलपुल बम 208 सिगरेट के बराबर प्रदूषण फैलाता है। 1 स्नैक टैवलेट बम 464 सिगरेट के बराबर प्रदूषण फैलाता है। इस  रिसर्च फाउंडेशन ने यह भी बताया था कि दिवाली के दिन भारत में 20 गुना प्रदुषण फैलता है। जरा सोचिये, हमारे पल भर के मनोरंजन की कीमत पर प्रकृति को यह नुक़सान चुकानी पड़ती है। इतना ही नहीं;  इन पटाकों की वजह से अनगिनत पक्षियां मौत के मुंह में समां जाती है। इसलिए हमें पटाका से होने वाली इन दुस्वारियों से बचना चाहिए और पटाखे नहीं जलाना चाहिए।

पुरे देश और पूरी दुनिया में सेलिब्रेट होने वाला न्यू ईयर, इस पर भी कुछ लोगों अपने छड़ भर के मनोरंजन के लिए पटाका जलाते है। इसका खामियाज़ा प्रकृति को उठाना पड़ता है। हमें प्रकृति को सतत स्वस्थ्य रखने के लिए मनोरंजन के इस तरीके को तिलांजलि कर मनोरंजन के अन्य तरीकों को अख़्तियार में लाना चाहिए। जो इन्वॉयरमेंट फ्रेंडली हो।

एक विशेष अपील और,  कुछ खास तौर के भाई लोग से और आज-कल (खास तौर पे शहरों में) इसमें कुछ बहन जी भी इन्वोल्व है। जो नये साल पे टन्न हो जाते/जाती है। आपकी वजह से ३१ दिसंबर की रात में एक्सीडेंट की घटनाएं बहुत बढ़ जाती है। इतना ही नहीं झगड़ा - फसात की संख्या भी बढ़ जाती है। आप तो खुद ध्वस्त होते ही है, कई बार एक सही व्यक्ति भी बिना गलती किये आपके बेवकूफियों का शिकार हो जाता है। इसलिए आप जैसे धुरन्धारों से विशेष अपील है कि आप इन नौटंकियों के भविष्यगामी परिणाम के मद्दे नजर अपने मनोरंजन के साधनों को अख्तियार में लाएंगे।

रघु द्वारा जनहित में जारी ........

Tuesday, 20 December 2016

जो शिक्षा बाहर में दी गई है वो व्यवस्था यहाँ पर हो

ये आजमगढ़ में लालगंज लोकसभा क्षेत्र से सांसद श्रीमती नीलम सोनकर जी का वक्तव्य चुनाव प्रचार  के समय का है। आप भी जानिए साहिबा ने क्या कहा था।

"....... लालगंज लोकसभा के, जो शिक्षा की व्यवस्था न होने के कारण लोग बाहर जाते है। चाहे वो लखनऊ जाये, बी एच यू जाये, दिल्ली जाये या कही भी जाये लेकिन शिक्षा के अभाव में उनको बाहर जाना पड़ता है। तो मैं चाहूंगी अगर मुझे ऐसा अवसर मिलता है तो यहाँ पर, जो शिक्षा बाहर में व्यवस्था दी गई है वो व्यवस्था यहाँ पर हो। ताकि यहाँ पर बच्चे बाहर जाकर न पढ़े।"

साहिबा के इस बात से हम बिल्कुल सहमत है और शायद पूरा आजमगढ़ सहमत है कि हां ये सही कह रही है। और इससे आजमगढ़ के ब्रेन ड्रेन को रोकने में मदद मिलेगी। इन्होंने फिर आगे ये भी कहा कि

"....... मैं चाहूंगी यहाँ पर जीतनी भी महिलाएं है और बालिका है, उन सबको उच्च शिक्षा प्राप्त हो और उच्च शिक्षा प्राप्त होने की वजह से वे जागरूक हो जाएँगी और अपने अधिकार को समझ सकेंगी कि सरकार ने उनके लिए क्या-क्या अधिकार दिया है और जब अधिकार अपना जान लेंगी तो वे एक जुट होकर, एक मत होकर, एक दिशा में काम करेंगी।"

बतौर महिला प्रत्यासी, महिलाओ की जरुरत बखूबी बतायीं थी। यह एक मजबूत इसारा था आजमगढ़ के विकास के लिए। उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि

"...... इस सब, जो मैं कर सकूँ अपने सरकार के सामने वो बात रखूं ताकि यहाँ कि समस्या जब वहाँ रखूंगी तो सुनी जाएगी और यहाँ का विकास कार्य होगा।"

सांसद महोदया से आजमगढ़ में विश्वविद्यालय के सन्दर्भ में #विश्वविद्यालय_अभियान कई बार संपर्क किया और इस जरुरत की ओर ध्यान आकर्षित किया। मैं खुद सांसद जी से आजमगढ़ में विश्वविद्यालय के सन्दर्भ में बात किया। सांसद महोदया ने कहा,

"हां आप लोगों की मांग तो बिल्कुल सही है और मैं इसका पूरा समर्थन करती हूँ। राज्य सरकार को यहाँ एक विश्वविद्यालय देना चाहिए। लेकिन मैं इसमें क्या कर सकती हूँ? आप बताइये मुझसे क्या चाहते है?"

 मैंने उनसे आग्रह किया कि,

 "मैडम हम सरकार से मांग कर रहे है और सूबे की सरकार हमारी बात नहीं सुन रही है। आप सरकार से बात कर सकती है। आप सीo एमo को लेटर लिख सकती है। तो शायद आजमगढ़ को विश्वविद्यालय मिल जाय। इसके बाद सांसद महोदया ने आश्वासन दिया ठीक है, अभी तो मैं दिल्ली में हूँ लेकिन सरकार से बात करुँगी।" और आज तक बात होती रही .........

आजमगढ़ को विश्वविद्यालय न मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा ......

राघवेंद्र यादव
विश्वविद्यालय अभियान


you may listen from mentioned link

https://www.youtube.com/watch?v=N-dNwIsS7kg