Sunday, 29 October 2017

विश्व गरीबी उन्मूलन दिवस


आज #विश्व_गरीबी_उन्मूलन_दिवस है। पिछले दिनों #ग्लोबल_हंगर_इंडेक्स आया था। जिसमे भारत दुनिया के सबसे ख़राब हालत में रह रहे बीस देशों में से एक है। आज सरकार, संस्थान, इंटेलेक्चुअल, रिसर्चर, एक्टिविस्ट, नेता, मीडिया, सोसल मीडिया ...... समेत हर वर्ग को इस मुद्दे पर पुरजोर बहस करनी चाहिए थी। समीक्षा करनी चाहिए थी। हर दृष्टिकोण से तहक़ीक़ात करनी चाहिए थी कि गरीबी उन्मूलन पर क्या हुआ है? क्या हो रहा है? क्या किया जाना चाहिए? लेकिन हैरत की बात है कि आज की ज्वलंत बहस मुहब्बत के किले पर चल रही है कि वह पर्यटक स्थल है या नहीं। सही मायने में यह बहस तो होनी ही नहीं चाहिए, अगर हो रही है तो यह विशुद्ध बेवकूफी है। विश्व गरीबी उन्मूलन दिवस पर सरकार और संस्थाओ का खामोश होना गैर गाम्भीर्यता को दर्शाता है। #विश्व_योग_दिवस मनाने में सरकार करोडो रूपये विज्ञापन में खर्च कर देती है। महीनों पहले से तैयारियां शुरू हो जाती है। सरकार योग दिवस पर जितना ध्यान देती है अगर उतना ध्यान गरीबी उन्मूलन दिवस पर देती तो भारत की भूखमरी को "राष्ट्रीय तमाचा" या "राष्ट्रीय शर्म" जैसे असहनीय पीड़ादायक शब्दों से नहीं नवाजा जाता। भारत की यह शर्मनाक हालात मानवीय शून्यता को दर्शाता है।