Friday, 17 November 2017

अन्य पिछड़े वर्ग को रिलैक्सेशन

अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण वैधानिक रूप से परिभाषित होने के बाद डीओपीटी ने एक ओएम निकाला जिसमे कहा गया था कि वे स्वायत्त निकाय/संस्था जो सरकार से अनुदान प्राप्त करती है, अपने संविधियों और अनुच्छेदों में स्टैण्डर्ड में रिलैक्सेशन जो अनुसूचित जाति और अनुसूचित जन जाति को उपलब्ध कराती थी वह रिलैक्सेशन अब अन्य पिछड़े वर्ग को भी दिया जायेगा। 2009 में डीओपीटी ने एक ओएम लेटर में यह भी कहा था कि यह संज्ञान में आया है कि कुछ स्वायत्त निकायों/संस्थाओ ने अपने संविधियों और अनुच्छेदों में इसके लिए उपयुक्त प्रावधान नहीं किये है। डीओपीटी ने सभी मंत्रालयों और विभागों से निवेदन किया था कि वे यह सुनिश्चित करें कि सभी स्वायत्त निकायों/संस्थाओ के संविधियों और अनुच्छेदों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए ऐसे प्रावधान कर्तव्यनिष्ठा पूर्वक कार्यान्वित किये जा रहे है।
सवाल ये है कि आज वर्षों बाद भी सरकार से अनुदान प्राप्त करने वाले अधिकांश स्वायत्त निकायों/संस्थाओ में इसका सही तरीके से अनुसरण नहीं हो रहा है। यह बात सम्बंधित आयोगों और मंत्रालयों को पता है कि अधिकांश जगह पर रिजर्वेशन/रिलैक्सेशन/कंसेशन का किसी न किसी रूप में उलंघन हो रहा है फिर भी वे हाथ पर हाथ धरे बैठे है। हालांकि इसका उलंघन करने वाली संस्थान के विरुद्ध दंडात्मक प्रावधान भी बने है फिर भी यह बिमारी ला-इलाज बनी हुई है। यह बीमारी तब तक ठीक नहीं होगी जब तक कि सामाजिक न्याय के योद्धा इस मुद्दे पर खामोस बने रहेंगे। पुरे देश के सभी स्वायत्त निकायों/संस्थाओ में सही और प्रभावी तरीके से इसे लागू करवाने के लिए सड़क से संसद तक लड़ाई की जरुरत है।