सामाजिक न्याय के योद्धा भूतपूर्व सांसद, भूतपूर्व केंद्रीय मंत्री और किसानों, मजदूरों, मजलूमों की आवाज आदरणीय श्री चंद्रजीत यादव जी की पुर्णतिथि पर हम श्रद्धांजलि-श्रद्धा-सुमन अर्पित करते है। यह सर्वविदित है कि आजमगढ़ अपने अतीत में समाजवादी और मार्क्सवादी विचारधारा का गढ़ रहा है और आज भी है। इस वैचारिक गढ़ को परिपक़्व बनाने में श्री चंद्रजीत जी का अमूल्य योगदान रहा है।
डॉ राम समुझ जी (IRS) ने अपनी पुस्तक "Reservation Policy: Its relevance in modern India" में चंद्रजीत जी की पुस्तक "आरक्षण क्यों" (why reservation?) का सन्दर्भ देते हुए लिखें है कि
Chandrajeet Yadav, a former Union Minister pointed out the reasons for better administration in the states of Tamilnadu, Karnataka and Kerala than that of UP, Bihar and M.P. saying that they implementaed the reservation policy in the beginning of 19th century much earlier than Hindi states and quantum of their reservation are about 68%.*
*Yadav, Chandrajeet – Arkshan kyo (why reservation?), Samajik Nyay Kendra, New Delhi, Pp. 10-11
यह पुस्तक अभी लोक-अनुक्षेत्र में नहीं है। मुझे नहीं पता कि इसमें क्या लिखा है लेकिन चंद्रजीत जी के द्वारा संसद में उठाये गए सवालों, उनके द्वारा किये गए बहस से थोड़ा-बहुत परिचित हूँ और इसके आलावा उनके द्वारा लड़े गए सामाजिक परिवर्तन की लड़ाई से भी कुछ परिचित हूँ। इस आधार पर मुझे उम्मीद है कि 'आरक्षण' पर जिन सवालों का जबाब आज हम ढूढ़ रहे है, शायद वे इस पुस्तक में हमें मिले।
सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ रहे जिम्मेदार लोगों से मैं अपील करता हूँ कि इस पुस्तक का पुनर्प्रकाशन करवायें और इसके आलावा इनकी दूसरी लेखनी को भी लोक-अनुक्षेत्र में लाएं। इनके (चंद्रजीत जी के) भाषणों जो लिखित, आडियो या वीडियो रूप में हो उन्हें संकलित करके प्रकाशित करवाया जाय। अगर ऐसा होता है तो हम सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ने वाले एक असाधारण व्यक्तित्व को फिर से जीवित कर पायेंगे।
डॉ राम समुझ जी (IRS) ने अपनी पुस्तक "Reservation Policy: Its relevance in modern India" में चंद्रजीत जी की पुस्तक "आरक्षण क्यों" (why reservation?) का सन्दर्भ देते हुए लिखें है कि
Chandrajeet Yadav, a former Union Minister pointed out the reasons for better administration in the states of Tamilnadu, Karnataka and Kerala than that of UP, Bihar and M.P. saying that they implementaed the reservation policy in the beginning of 19th century much earlier than Hindi states and quantum of their reservation are about 68%.*
*Yadav, Chandrajeet – Arkshan kyo (why reservation?), Samajik Nyay Kendra, New Delhi, Pp. 10-11
यह पुस्तक अभी लोक-अनुक्षेत्र में नहीं है। मुझे नहीं पता कि इसमें क्या लिखा है लेकिन चंद्रजीत जी के द्वारा संसद में उठाये गए सवालों, उनके द्वारा किये गए बहस से थोड़ा-बहुत परिचित हूँ और इसके आलावा उनके द्वारा लड़े गए सामाजिक परिवर्तन की लड़ाई से भी कुछ परिचित हूँ। इस आधार पर मुझे उम्मीद है कि 'आरक्षण' पर जिन सवालों का जबाब आज हम ढूढ़ रहे है, शायद वे इस पुस्तक में हमें मिले।
सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ रहे जिम्मेदार लोगों से मैं अपील करता हूँ कि इस पुस्तक का पुनर्प्रकाशन करवायें और इसके आलावा इनकी दूसरी लेखनी को भी लोक-अनुक्षेत्र में लाएं। इनके (चंद्रजीत जी के) भाषणों जो लिखित, आडियो या वीडियो रूप में हो उन्हें संकलित करके प्रकाशित करवाया जाय। अगर ऐसा होता है तो हम सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ने वाले एक असाधारण व्यक्तित्व को फिर से जीवित कर पायेंगे।
साभार
हथौटवी पहल
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