Saturday, 10 August 2019

"आजमगढ़ विश्वविद्यालय, आजमगढ़"


"रूह-ए-आजमगढ़ में तामीर-ए-विश्वविद्यालय उतना ही प्रासंगिक है जितना किसी बेघर को घर देना।"
(राघवेन्द्र)


यह सर्वविदित है कि गुणवत्तापरक उच्च शिक्षा की जरुरत ने आजमगढ़ में विश्वविद्यालय की मांग के लिए प्रेरित किया। यहाँ के बुद्धजीवियों द्वारा यह भी कयास लगाया जा रहा है कि आजमगढ़ में विश्वविद्यालय बनने से यहाँ का बहुमुखी विकास होगा। उत्तर प्रदेश के विधान सभा में माननीय मुख्यमंत्री जी द्वाराआजमगढ़ में विश्वविद्यालय की घोषणा किये जाने के बाद से ही इसके स्थापना के लिए भूमि पर चर्चायें शुरू हो गई थीं। माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा आजमगढ़ दौरे के बाद इस पर प्रशासनिक कार्य भी तेजी से हुआ। उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम में संशोधन कर "आजमगढ़ विश्वविद्यालय, आजमगढ़" बनाये जाने के बाद ये अतिआवश्यक हो चूका है। इस बीच समाचार के सुर्खियों से कुछ खबरें मिलती रही कि यहाँ जमीन मिली वहाँ जमीन मिली। यह भी खबर थीं कि विश्वविद्यालय के लिए 50 एकड़ जमीं पर्याप्त है। इस सन्दर्भ में ‘विश्वविद्यालय अभियान टीम’ के साथियों ने भी काफी खोज-बिन कर प्रशासन को सुझाव दिए। मैं उत्तर प्रदेश सरकार से यह अपील कर रहा हूँ कि "आजमगढ़ विश्वविद्यालय, आजमगढ़" सिर्फ सर्टीफिकेट बाटने वाली संस्था न होकर यह पूर्ण-आवासीय और विश्व स्तरीय सुविधायुक्त विश्वविद्यालय हो।

आजमगढ़ की अवाम का आवाज बनकर मैं उत्तर प्रदेश सरकार से यह निवेदन कर रहा हूँ कि आजमगढ़ की आभा और प्रतिभा को ध्यान में रखते हुए "आजमगढ़ विश्वविद्यालय, आजमगढ़" में उच्च शिक्षा से सम्बंधित प्राचीन पाठ्यक्रमों से लेकर नवीन पाठ्यक्रमों के लिए केंद्र/विभाग बनें। जहाँ से राज्य को और इस देश को बेहतर मानव संसाधन मिल सकें। यहाँ से अच्छे प्रशासक निकले, अच्छे वैज्ञानिक निकले, अच्छे समाज वैज्ञानिक निकले, अच्छे शिक्षाविद निकले, अच्छे इंजीनियर निकले, अच्छे प्रबंधक निकले, अच्छे  डाक्टर निकले, अच्छे नेता निकले, अच्छे अभिनेता निकले, अच्छे खिलाड़ी  ....... आदि निकले। एक ऐसा विश्वविद्यालय जो भारत को विश्व गुरु बनाने में नेतृत्व कर सके। इस तरह के विश्वविद्यालय के लिये 50 एकड़ जमीन बेहद संकुचित स्थान होगा। ज्ञात हो कि देश के और दुनिया के नामचीन विश्वविद्यालयों को ज्यादा जमीन आवंटित है। "आजमगढ़ विश्वविद्यालय, आजमगढ़" के लिए कम से कम 250 एकड़ से 300 एकड़ के बीच होना चाहिए। आजमगढ़ ग्रामीण बाहुल्य इलाका है। मेरा निजी मानना है कि इस विश्वविद्यालय को शहर के भीड़-भाड़ से अलग खुले में एक ऐसे जगह पर होना चाहिए जहाँ पर यातायात की सुविधा उपलब्ध हो। मैं उत्तर प्रदेश सरकार से यह उम्मीद करता हूँ कि राजनीतिक आपा-धापी से ऊपर उठकर आजमगढ़ में विश्वविद्यालय की स्थापना की जायेगी।

मैं उत्तर प्रदेश सरकार से यह मांग करता हूँ कि सरकार "आजमगढ़ विश्वविद्यालय, आजमगढ़" के लिए एक कमेटी का गठन करे जो निष्पक्ष रूप से इसके लिए एक मॉडल विकसीत करे। जिसमें इसके स्थापना के लिए सबसे उपयुक्त जगह चिन्हित हो  और वहाँ की उपलब्धता और जरूरतों को ध्यान में रख कर कोर्स का सुझाव दे।
सधन्यवाद

राघवेन्द्र यादव 
आजमगढ़

Friday, 10 May 2019

किसी पार्टी को वोट न देकर किसी प्रत्यासी को देखिये

साहित्यकार काशीनाथ सिंह जी ने पिछले आम चुनाव में कहा था कि अगर "मोदी जीते तो काशी हार जाएगी" उनका यह वक्तव्य आजमगढ़ सदर सीट के लिए भी उतना ही प्रासंगिक था जितना बनारस के लिए। जिसे हम जैसे अनेकानेक लोगों ने माना था कि अगर आजमगढ़ से श्री मुलायम सिंह यादव जी जीत गए तो आजमगढ़ हार जायेगा। और हुआ भी यही।
हमारे संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ सदर से श्री मुलायम जी चुनाव जितने के बाद या तो जन्मोत्सव मनाने गए या फीता काटने। क्या हमारे माननीय सांसद श्री मुलायम जी ये बताएंगे कि वे आजमगढ़ की कितनी समस्यायों को अपने इस कार्यकाल में सदन में उठायें है? क्या आप ये बताएंगे कि आपको आजमगढ़ की जनता बतौर सांसद क्यों नकार रही है?
श्री अखिलेश जी जो अस्मित्ता की राजनीति कर रहे है। जिनका राजनीति उनके राजनीतिक अनुभव से कही ज्यादा उनके पारिवारिक पहचान पर टिका है। क्या वे भी पांच साल बाद वर्तमान सांसद जी के पद चिन्हों पर चल कर अगले चुनाव में किसी और सीट से चुनाव लड़ कर आजमगढ़ सदर की सीट अपने परिवार के किसी और व्यक्ति को खड़ा कर देंगे?
आज़मगढ़ की अवाम से अपील है कि वे वोट के पहले खूब सोच समझ लें कि जो बदलाव पांच साल बाद हुआ है फिर पांच साल बाद वही न करना पड़े। और हां इसका मतलब ये भी नहीं है कि इनके विकल्प में इन्ही जैसे किसी और प्रवसनकारी को जगह दे दें। जो चुनाव जीतने के बाद आपके बीच न मिले। इसलिए आप लोग दलगत राजनीति से ऊपर उठ कर किसी पार्टी को वोट न देकर किसी प्रत्यासी को देखिये। और आपके नजर में जो प्रत्यासी सबसे उपयुक्त हो उसे वोट करें।
और हां!!
संभव हो तो वोट जरूर करें। आपके नजर में कोई प्रत्यासी सही नहीं है तो भी वोट करें, नोटा ही सही।
(नोट: प्रवसन से हमारा तात्पर्य यह नहीं है कि कोई बाहर से आकर चुनाव नहीं लड़े। भारत का कोई भी व्यक्ति किसी भी सीट से चुनाव लड़े लेकिन कम से कम वह निर्वाचन क्षेत्र जहाँ से वह चुनाव लड़ रहा हो वह उसका कार्य क्षेत्र हो। कल को चुनाव जितने के बाद वह वहां की जनता को आसानी से मिल सके।)
राघवेंद्र:
आजमगढ़ सदर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र का एक वोटर

आजमगढ़ में विश्वविद्यालय बनाये जाने का विरोध क्यों ?

अटैच्ड स्क्रीनशॉट पिछली सरकार में श्री ध्रुव कुमार त्रिपाठी जी द्वारा #आजमगढ़_में_विश्वविद्यालय के सन्दर्भ में विधान परिषद् उत्तर प्रदेश में माननीय मुख़्यमंत्री जी से पूछा गया सवाल है। सरकार के मंत्रीजी जवाब दिए कि आजमगढ़ में विश्वविद्यालय बनाया जाना प्रासंगिक नहीं है। इसका मतलब है कि वे आजमगढ़ में विश्वविद्यालय बनाये जाने का विरोध कर रहे थे। अगर कलम से लिखा गया उत्तर तत्कालीन मुख्यमंत्री मिस्टर Akhilesh Yadav जी का है तो यह निंदनीय है। इस जबाब से आजमगढ़ में विश्वविद्यालय का चाहत रखने वाला हर व्यक्ति आहात हुआ था।
वही सरकार प्राइवेट विश्वविद्यालय के लिए अधिनियम लायी थी और उन्होंने कहा था, ".... सैद्धान्तिक रूप से हम लोग किसी भी नए विश्वविद्यालय की स्थापना का कभी भी विरोध नहीं करते है।" अगर नए विश्वविद्यालय बनाने के सन्दर्भ में वाकयी आपके विचार ऐसे है तो यह सराहनीय विचार है और हम ऐसे विचार का स्वागत करते है। मैं यह जानना चाहता हूँ कि प्राइवेट विश्वविद्यालय के लिए ही ऐसे विचार क्यों है ? राज्याश्रित विश्वविद्यालय के लिए ऐसे विचार क्यों नहीं है? मैं जानना चाहता हूँ कि अगर एक प्राइवेट कालेज को विश्वविद्यालय बनाने के लिए इतना मधुर और बौद्धिक विचार दिए गए तो आजमगढ़ में विश्वविद्यालय बनाने के लिए इतना निष्क्रिय और उलजुलूल उत्तर क्यों दिया गया? #हम चाहते है कि इसके लिए मिस्टर अखिलेश जी को आजमगढ़ के अवाम से #माफ़ी मांग लेना चाहिए।

Friday, 11 January 2019

124th Amendment Constitution Bill 2019

Central Government ought to have completed its homework on 124th Amendment Constitution Bill 2019. Such type of suggestions have been given by several parliamentarians during the discussion on the same subject in both houses Upper and Lower. Was it really missed by Central Government? Was it really Chunavi Stunt as a segment of people, specialist, media .... and others said? Was the Government (BJP) feared by the results of recently passed election? Was the Government hurried? So, it became subject of discussion without legislative scrutiny. The Government didn't think to send it to Standing Committee of Parliament for their consideration. I think, it is not true. It is neither the subject of hurried nor Chunavi Stunt. It is a subject of Brahmanical sly trick because casteist domain of the Government and ''Others" know, if it will become subject of examination or will be tied on criterion of the legality then this Bill will be rejected on that place and will not be part of Parliamentary discussion because 'reservation' is not the subject of "Income" it is the subject of "Representation" and "Exploitation from the years". The 'Brahmanical set-up' know this hard truth. That's why Government bring it in the last session of last year of the governing period. Some parliamentarians said that Government did not do anything since last fifty seven months. I think, Government was waiting for the last year, last session from long time. Clever brilliant Congresi (pseudo Brahmanic) are the real hero of this draconian Bill.
So, I congratulate to Congres Pary, not to the BJP because personally, I believe that intellectual of BJP can't do such type of act without help of Clever brilliant Congresi (pseudo Brahmanic).
Generally, I am not against any policy, who made for poor. I believe that this Bill is not the treatment of the economic problem in right manner.
YE JANATA HAI SAHAB, SAB SAMAJHTI HAI...