Friday, 10 May 2019

किसी पार्टी को वोट न देकर किसी प्रत्यासी को देखिये

साहित्यकार काशीनाथ सिंह जी ने पिछले आम चुनाव में कहा था कि अगर "मोदी जीते तो काशी हार जाएगी" उनका यह वक्तव्य आजमगढ़ सदर सीट के लिए भी उतना ही प्रासंगिक था जितना बनारस के लिए। जिसे हम जैसे अनेकानेक लोगों ने माना था कि अगर आजमगढ़ से श्री मुलायम सिंह यादव जी जीत गए तो आजमगढ़ हार जायेगा। और हुआ भी यही।
हमारे संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ सदर से श्री मुलायम जी चुनाव जितने के बाद या तो जन्मोत्सव मनाने गए या फीता काटने। क्या हमारे माननीय सांसद श्री मुलायम जी ये बताएंगे कि वे आजमगढ़ की कितनी समस्यायों को अपने इस कार्यकाल में सदन में उठायें है? क्या आप ये बताएंगे कि आपको आजमगढ़ की जनता बतौर सांसद क्यों नकार रही है?
श्री अखिलेश जी जो अस्मित्ता की राजनीति कर रहे है। जिनका राजनीति उनके राजनीतिक अनुभव से कही ज्यादा उनके पारिवारिक पहचान पर टिका है। क्या वे भी पांच साल बाद वर्तमान सांसद जी के पद चिन्हों पर चल कर अगले चुनाव में किसी और सीट से चुनाव लड़ कर आजमगढ़ सदर की सीट अपने परिवार के किसी और व्यक्ति को खड़ा कर देंगे?
आज़मगढ़ की अवाम से अपील है कि वे वोट के पहले खूब सोच समझ लें कि जो बदलाव पांच साल बाद हुआ है फिर पांच साल बाद वही न करना पड़े। और हां इसका मतलब ये भी नहीं है कि इनके विकल्प में इन्ही जैसे किसी और प्रवसनकारी को जगह दे दें। जो चुनाव जीतने के बाद आपके बीच न मिले। इसलिए आप लोग दलगत राजनीति से ऊपर उठ कर किसी पार्टी को वोट न देकर किसी प्रत्यासी को देखिये। और आपके नजर में जो प्रत्यासी सबसे उपयुक्त हो उसे वोट करें।
और हां!!
संभव हो तो वोट जरूर करें। आपके नजर में कोई प्रत्यासी सही नहीं है तो भी वोट करें, नोटा ही सही।
(नोट: प्रवसन से हमारा तात्पर्य यह नहीं है कि कोई बाहर से आकर चुनाव नहीं लड़े। भारत का कोई भी व्यक्ति किसी भी सीट से चुनाव लड़े लेकिन कम से कम वह निर्वाचन क्षेत्र जहाँ से वह चुनाव लड़ रहा हो वह उसका कार्य क्षेत्र हो। कल को चुनाव जितने के बाद वह वहां की जनता को आसानी से मिल सके।)
राघवेंद्र:
आजमगढ़ सदर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र का एक वोटर

आजमगढ़ में विश्वविद्यालय बनाये जाने का विरोध क्यों ?

अटैच्ड स्क्रीनशॉट पिछली सरकार में श्री ध्रुव कुमार त्रिपाठी जी द्वारा #आजमगढ़_में_विश्वविद्यालय के सन्दर्भ में विधान परिषद् उत्तर प्रदेश में माननीय मुख़्यमंत्री जी से पूछा गया सवाल है। सरकार के मंत्रीजी जवाब दिए कि आजमगढ़ में विश्वविद्यालय बनाया जाना प्रासंगिक नहीं है। इसका मतलब है कि वे आजमगढ़ में विश्वविद्यालय बनाये जाने का विरोध कर रहे थे। अगर कलम से लिखा गया उत्तर तत्कालीन मुख्यमंत्री मिस्टर Akhilesh Yadav जी का है तो यह निंदनीय है। इस जबाब से आजमगढ़ में विश्वविद्यालय का चाहत रखने वाला हर व्यक्ति आहात हुआ था।
वही सरकार प्राइवेट विश्वविद्यालय के लिए अधिनियम लायी थी और उन्होंने कहा था, ".... सैद्धान्तिक रूप से हम लोग किसी भी नए विश्वविद्यालय की स्थापना का कभी भी विरोध नहीं करते है।" अगर नए विश्वविद्यालय बनाने के सन्दर्भ में वाकयी आपके विचार ऐसे है तो यह सराहनीय विचार है और हम ऐसे विचार का स्वागत करते है। मैं यह जानना चाहता हूँ कि प्राइवेट विश्वविद्यालय के लिए ही ऐसे विचार क्यों है ? राज्याश्रित विश्वविद्यालय के लिए ऐसे विचार क्यों नहीं है? मैं जानना चाहता हूँ कि अगर एक प्राइवेट कालेज को विश्वविद्यालय बनाने के लिए इतना मधुर और बौद्धिक विचार दिए गए तो आजमगढ़ में विश्वविद्यालय बनाने के लिए इतना निष्क्रिय और उलजुलूल उत्तर क्यों दिया गया? #हम चाहते है कि इसके लिए मिस्टर अखिलेश जी को आजमगढ़ के अवाम से #माफ़ी मांग लेना चाहिए।