आदिवासी जननायक, महापुरुष, और समाज सुधारक बिरसा मुंडा ने 19वीं सदी के आखिरी वर्षों में उलगुलान आन्दोलन को अंजाम दिया। कहते है इतिहास भगवान से भी बड़ा होता है क्योकि भगवान सिर्फ भविष्य बनाता और बिगाड़ता है भूतकाल को नहीं छेड़ सकता लेकिन इतिहास भूतकाल को भी बनाता और बिगाड़ता है. इतिहास की मार खाने वालो में एक प्रमुख नाम श्री बिरसा मुंडा जी का भी है. बिरसा जी को इतिहास ने चाहे जितना रौंदा हो लेकिन वे आज भी लाखो लोगो के लिए वैचारिक ऊर्जा के केंद्र है जिन्हे दलित समाज भगवान की तरह पूजता है.
बिरसा मुण्डा ने मुण्डा विद्रोह पारम्परिक भू-व्यवस्था के जमींदारी व्यवस्था में बदलने के कारण किया. बिरसा मुण्डा ने अपनी सुधारवादी प्रक्रिया के तहत सामाजिक जीवन में एक आदर्श प्रस्तुत किया. 9 जून बिरसा मुंडा जी के पुण्य तिथि पर हम श्रदांजलि-श्रद्धा-सुमन अर्पित करते है।