Thursday, 11 August 2016

आदिवासी हालात और दिवस

जोहार साथियों,
विश्व आदिवासी दिवस दुनिया के महत्वपूर्ण दिवसों में से एक है। अगर युo एनo के आकड़ो पर गौर करे तो दुनिया के 90 देशों में लगभग 370 मिलियन आदिवासी है। जिनके पास 7००० (सात हजार) भाषाएँ और 5००० (पांच हजार) अलग-अलग कल्चर है। आदिवासियों का मौखिक साहित्य अत्यंत समृद्ध है। लोक कथाओं, गीतों, कहावतों और मुहावरों की वाचिक परंपरा आदिवासी समुदायों में भरी-पड़ी है। 
 विश्व के विभिन्न देशों में निवासरत आदिवासियों के मानव अधिकार की सुरक्षा के लिए यु0 एन0 ने 1982 में एक सब-कमीशन बनाया। इस कमीशन ने यह पाया की आदिवासी गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी, बंधुआ मजदूर और सामाजिक उपेक्षा जैसे समस्याओं से जूझ रहे हैं। इन समस्याओ  के निराकरण हेतु यु0 एन0 वर्किंग ग्रुप के सब-कमीशन ने 9 अगस्त 1982 में  विश्व आदिवासी दिवस मनाने का प्रस्ताव यु0 एन0 जनरल असेम्बली में रखा जिसे 1994 में यु0 एन0 जनरल असेम्बली ने स्वीकार कर लिया। 9 अगस्त 2016 को विश्व आदिवासी दिवस, शिक्षा के अधिकार को समर्पित है।
आदिवासियों का अपना धर्म है। ये प्रकृति को अपना ईस्ट देव मानते है और जंगल, पहाड़, नदियों..... आदि की आराधना करते हैं।  लेकिन दूभर हालात होने के नाते ईसाई मशीनरी, इस्लामिक मशीनरी, हिन्दू मशीनरी....... आदि ने कुछ लोभ देकर या जबरन धर्म परिवर्तन करवाया। परंतु आज ये स्वयं की धार्मिक पहचान के लिए संगठित हो रहे हैं। अगर हम भारत के आदिवासियों की बात करे तो ब्राहमेनिकल मैकेनिजम ने इन्हें कभी आदमी के रूप में स्वीकार ही नहीं किया। लेकिन यह भी एक विडम्बना है की  "रामायण", जिसपर हिन्दू धर्म का ताना-बाना  बुना गया है, के रचयिता महर्षि वाल्मीकि जी आदिवासी थे। 
हम आज 23वे विश्व आदिवासी दिवस को मना रहे है। लेकिन सरकारें जो प्रयास दूसरे विश्व दिवसों को मनाने में करती है वो विश्व आदिवासी दिवस मनाने में नहीं करती। इस दिवस पर मीडिया में भी गाहे-बगाहे ही खबरें, लेख  या संपादकीय दिखती है। जो यह दर्शाता है कि लोग आदिवासियों के जीवन स्तर में सुधार को लेकर कितना जागरूक या चिंतित है। आज से दो साल बाद हम विश्व आदिवासी दिवस का 25वा  विश्व आदिवासी दिवस मनाएंगे। अगर 25वे  विश्व आदिवासी दिवस को यु0 एन0 विश्व आदिवासी वर्ष के रूप में मनाये तो आदिवासियों के जीवन स्तर में सुधार लाने का एक बड़ा प्रयास होगा।


राघवेंद्र यादव 
शोधार्थी 
सेंटर फॉर स्टडीज एंड रिसर्च इन इकोनॉमिक्स एंड प्लानिंग 

सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ़ गुजरात 

No comments:

Post a Comment