Sunday, 12 February 2017

इनकी, देश-द्रोहिता पर आवाज नहीं उठती

"हिंदुस्तान - मुर्दाबाद", "भारत के बर्बादी तक - जंग रहेगी, जंग रहेगी" यह नारा दिया गया जो देश के लिए शर्म की बात है। हमारी असहमति देश की प्रशासनिक व्यवस्था से हो सकती है। हमारी असहमति देश की कानून व्यवस्था से हो सकती है। हमारी असहमति देश की गद्दार नेताओ से हो सकती है। हमारी असहमति देश के उन तमाम लोगो/संस्थाओ से भी हो सकती है जो लोग आधिकारिक रूप से सिस्टम में रह कर, देश का आगे बढ़ाने के नाम पर देश को लात मार रहे है। देश को लूट रहे है। जो देश को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बर्बाद कर रहे है, इन तमाम लोगो से हमारी असहमति है। लेकिन हमारे इस असहमति का मतलब ये नहीं होना चाहिए कि हम जिसके लिए लड़ रहे है, उसी का मुर्दाबाद करने लगे। वैसे जे एन यू के छात्रों को ऐसा क्यों करना पड़ा यह विचार का मुद्दा होना चाहिए। लेकिन सवाल ये है की सिर्फ वही देश द्रोही के श्रेणी में क्यों है? क्या दंगे कराने वाले देश द्रोही के श्रेणी में नहीं आते? इनको देश से निकालने का कथित-वीजा कोई नहीं देता। इनकी देश-द्रोहिता पर आवाज नहीं उठती है. ऐसे पक्षपातीय राष्ट्र भक्ति पर भी लानत होनी चाहिए। इस पर विचार करने के जगह राजनीति करने वालो तुम पर शर्म है।

No comments:

Post a Comment