Monday, 31 March 2025

भारत और कौमी यकजहती

 पूरी दुनिया में ईद मनाने वाले लोगों को ईद मुबारक!!

अगर मैं भारत की बात करूँ तो धार्मिक ठेकेदार कौमी यकजहती के खिलाफ रहे है। ये ड्यूल स्टेट थ्योरी के दौर से लेकर (संभवत इसके पहले भी) स्वतंत्रता संग्राम के समय  सहित आज तक सत्ता के लिए ये अनेकता में एकता जैसी विशाल संस्कृति को क्षरित करते रहें हैं। हैरत की बात ये है कि कुछ लोग अपनी राजनीतिक दुकान चलाने के लिए ये खड्यंत्र रचते है और आम भारतीय उनके खड्यंत्र का शिकार हो जाता है। क्या भारत में हिन्दू और मुस्लिम का ये सम्बन्ध रहा है जिसे आईटी सेल और गोदी मीडिया दिखाने की कोशिश करती है? नहीं, बिलकुल नहीं। भारत में हिन्दू-मुस्लिम सम्बन्ध को गंगा-जमुनी तहजीब जैसे पवित्र रिश्ते से नवाजा गया है। आम हिन्दू या आम संत कभी किसी धर्म के खिलाफ नहीं रहा है। ठीक उसी तरह आम मुस्लिम या आम मुस्लिम धर्मगुरु कभी किसी धर्म के खिलाफ नहीं रहा है लेकिन फिर भी समाज में धार्मिक नफरत अगर दिखती है तो वो सत्ता की कुर्सी पाने की राजनीति है जो धार्मिक नफरत को जन्म देती है और सांप्रदायिक दंगे करवाती है। 

हिन्दू-मुस्लिम यकजहती और लगाव का उदाहरण मैं अपने घर से दे रहा हूँ! 

मेरे बाबाजी गोलोकवासी श्री रामनाथ यादव एक गवर्नमेंट एडेड इंटर कॉलेज में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी थे। वे इसके साथ-साथ वैष्णव पंथ के गृहस्थ सन्यासी भी थे। जो लोग हिन्दू धर्म की समझ रखते है उनको पता होगा कि सन्यासियों के अलग-अलग आधारों पर कई तरह के वर्गीकरण है। उनमें एक वर्गीकरण यह भी है कि सन्यासी दो तरह के होते है एक वे जो घर-परिवार छोड़कर सन्यास ग्रहण करते है और दूसरे वे जो घर-परिवार में रह कर सन्यास ग्रहण करते है। जो घर परिवार में रह कर सन्यास ग्रहण करते है उनको गृहस्थ सन्यासी करते है। मेरे बाबाजी जी गृहस्थ सन्यासी थे और वे बहुत ही दयालु थे। मानवता उनके लिए सर्वोपरि था। 

हम सबके होम डाक्टर होते है। इसी तरह होम किरानावाला, होम सब्जीवाला, होम कपड़ावाला और होम टेलर.... इत्यादि होते है। उस समय मेरा बचपन था और हमारे होम टेलर श्री क़ुरैश मियां जी होते थे और वे मेरे बाबाजी के अच्छे दोस्त थे। हमारे घर के सारे कपडे वहीं सिलाए जाते थे। लगाव इन लोगों में इतना था कि खिचड़ी (मकरसंक्रांति) के त्यौहार पर मेरे बाबा उन्हें खिचड़ी देते थे जिसमें लाई, चुरा भेली और तिलवा होता था। और ईद के त्यौहार पर श्री क़ुरैश मियां जी मेरे घर ढ़ेर सारी सेवई भेजते थे। भारत में हिन्दू-मुस्लिम सम्बन्ध ऐसे थे। इसको गंगा-जमुनी तहजीब नाम दिया गया। इसको अनेकता में एकता कहा गया। 

ये कौन लोग है जो इस बात की वकालत करते है कि जिस रास्ते से कांवरिये निकल रहे है उस रास्ते पर कोई मुस्लिम फल की दुकान नहीं लगा सकता? ये वही लोग है जो कुर्सी के लिए भारत के विशाल संस्कृति से खेल रहे है और समाज में मानवता के खिलाफ जहर बो रहे है। 

गोदी मीडिया जब (खासकर चुनावों में) समाज में जहर बो रही थी तब बीबीसी हिंदी इस क्षेत्र (कौमी यकजहती) में अच्छा काम किया। इनके (बीबीसी हिंदी) खोजी पत्रकार हिन्दू-मुस्लिम के ऐसे दास्ताँ को प्रस्तुत किया जिससे समाज में अमन कायम हो सके। 

मैं पूरी दुनिया में ईद मनाने वाले लोगों को एक बार फिर ईद की हार्दिक बधाई देता हूँ। ईद मुबारक!!


:राघवेंद्र 

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