Saturday, 9 July 2016

साथियों, हममें से कुछ लोगों को आजमगढ़ में विश्वविद्यालय की मांग को लेकर कन्फ्यूजन है कि हम आजमगढ़ में एक नये विश्वविद्यालय की मांग कर रहे है या शिब्ली नेशनल कालेज को विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने के लिए मांग कर रहे है? साथियों मैं आप लोगों को बता दू कि शिब्ली नेशनल कालेज के प्रिंसिपल महोदय से हमारी बात हुई है और वे बताये है कि, शिब्ली नेशनल कालेज की प्रबंध समिति ऐसी कोई मांग नहीं की है। वे खुद चाहते है कि आजमगढ़ में एक नया विश्वविद्यालय बने। इसके लिए वे #मिशन_यूनिवर्सिटी_इन_आजमगढ़ के साथ है। आजमगढ़ में विश्वविद्यालय बनने पर शिब्ली नेशनल कालेज को स्वायत्त डिग्री कालेज बनाया जा सकता है। साथियों हमारी मांग स्पष्ठ है की हम आजमगढ़ में नये विश्वविद्यालय के लिए आंदोलन कर रहे है और यह विश्वविद्यालय पूर्ण आवासीय होना चाहिए तथा विश्वस्तरीय सुविधा युक्त होना चाहिए। हमें सिर्फ सर्टिफिकेट बाटने वाली संस्था नहीं चाहिए। हमे शैक्षणिक गुणवत्तापरक विश्वविद्यालय चाहिए।

"विश्वविद्यालय अभियान संघर्ष समिति"

Monday, 16 May 2016

आजमगढ़ पुरे प्रदेश में प्रथम स्थान पर

बधाई हो !!!!!!

आजमगढ़ के होनहारों ने अपना लोहा मनवा दिया। 
यूपी बोर्ड 2016 हाईस्कूल के रिजल्ट में, जिला स्तरीय मेरिट के आधार पर आजमगढ़ 95.12% के साथ पुरे प्रदेश में प्रथम स्थान पर है। 
अब ये इंटर के बाद किस यूनिवर्सिटी के हिस्सा बनेंगे? इनमें जो इकोनोमिकली वीक होंगे उनका क्या होगा? 
सरकार से अनुरोध है कि आजमगढ़ के इन टैलेंट्स को रौदें नहीं, इनके टैलेंट पर रहम करे। ये आजमगढ़ के ही नहीं, उत्तर प्रदेश के ही नहीं, देश के भविष्य है। यहाँ अतिशीघ्र एक यूनिवर्सिटी का निर्माण करवाए।

Saturday, 14 May 2016

आजमगढ़ में विश्वविद्यालय की मांग किसका हिस्सा?

आजमगढ़ में विश्वविद्यालय की मांग को उत्तर प्रदेश सूबे की सरकार स्वीकार नहीं कर रही है। सरकार मनमानी पूर्ण तर्क देकर कहती है कि आजमगढ़ में विश्वविद्यालय बनाया जाना प्रासंगिक नहीं है। सूबे की सरकार को मैं बता देना चाहता हूँ कि आजमगढ़ में विश्वविद्यालय, निरर्थक अलंकरण का हिस्सा नहीं है। यह बुनियादी जरूरतों को पूरा करने का हिस्सा है। यह गरीबों और उच्च शिक्षा से बंचित लोगो को हक दिलाने का हिस्सा है। यह ग्रामीण छात्राएं जो कुछ कारणों से उच्च शिक्षा के लिए जनपद से बहार नहीं जा पाती उनको मौका देने का हिस्सा है। फिर भी सूबे की सरकार को लगता है कि आजमगढ़ में विश्वविद्यालय बनाया जाना प्रासंगिक नहीं है तो मैं शिक्षा मंत्री यु पी, मुख्यमंत्री यु पी और पुरे उत्तर प्रदेश सरकार को चैलेन्ज करता हूँ कि वे कभी भी आजमगढ़ में विश्वविद्यालय बनाए जाने की प्रासंगिकता पर बात कर सकते है, बहस कर सकते है, संवाद कर सकते है। 
हम लेकर रहेंगे ........विश्वविद्यालय 
आजमगढ़ में ........विश्वविद्यालय

Monday, 21 March 2016

आजमगढ़ में विश्वविद्यालय

"रूह-ए-आजमगढ़ में तामीर-ए-विश्वविद्यालय उतना ही प्रासंगिक है जितना किसी बेघर को घर देना।"


गुणवत्तापरक उच्च शिक्षा की जरुरत ने आजमगढ़ में विश्वविद्यालय की मांग के लिए प्रेरित किया। आजमगढ़ में विश्वविद्यालय की मांग चार दशक से भी ज्यादा पुरानी है। शिक्षा के दृष्टिकोण से अगर एक पीढ़ी के लिए  20 वर्ष माना जाय तो 40 वर्ष में दो पीढ़िया बीत चुकी है। अब हम तीसरी पीढ़ी के लोग हैं जो आजमगढ़ में विश्वविद्यालय की मांग कर रहे हैं और उत्तर प्रदेश सरकार इस मांग को ठुकरा  रही है। अभी हाल ही में श्री ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने विधान परिषद में सरकार से आजमगढ़ में विश्वविद्यालय बनाये जाने से सम्बंधित सवाल पूछे थे। उनका जबाब देते हुए सरकार के मंत्री श्री विजय बहादुर पाल ने कहा कि आजमगढ़ में विश्वविद्यालय की स्थापना का औचित्य इस लिए नहीं पाया गया क्योंकि पड़ोस के जनपद वाराणसी, जौनपुर, गोरखपुर, फैजाबाद, इलाहाबाद में पहले से ही विश्वविद्यालय स्थापित है। माननीय मंत्री महोदय के इस जबाब से आजमगढ़ में विश्वविद्यालय की चाहत रखने वाले  लोग हतप्रभ और इताव हैं क्योंकि ऐसे तर्कहीन और मनमानीपूर्ण जबाब की तख़य्युल नहीं थी। माननीय जी का यह जबाब उस डरावने  सांप जैसा है जो विश्वविद्यालय में पढ़ने की चाहत रखने वाले हजारों युवाओं को अपनी फुंफकार से डरा रहा है।

      मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूँ कि क्या आपकी सरकार वास्तव में इस तरह के प्रतिमान पर निर्णय लेती है? माननीय जी मैं आपको याद दिला दू कि वर्तमान सरकार ने ही 2013-2014 के बजट भाषण में इलाहाबाद में राज्य विश्वविद्यालय स्थापित करने का प्रावधान किया था। जबकि इलाहाबाद में पहले से ही केंद्रीय विश्वविद्यालय, डीम्ड विश्वविद्यालय, ओपेन विश्वविद्यालय सहित चार विश्वविद्यालय थे। इसके अलावा एनo आईo टीo और ट्रिपल आईo टीo भी था। ऐसे में वहा विश्वविद्यालय की खास जरुरत नहीं थी लेकिन  सरकार ने वहा विश्वविद्यालय खोला।  माननीय मंत्री जी,  मेरा मानना है कि एक जनपद में चार विश्वविद्यालय स्थापित करने से अच्छा है कि चार जनपद में एक-एक विश्वविद्यालय स्थापित किया जाय। जो ज्यादा तर्क संगत और प्रासंगिक होगा। 


       दूसरा सवाल, मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूँ कि अगर जौनपुर की जनसँख्या 44 लाख है और वहा विश्वविद्यालय है, फैजाबाद की जनसँख्या 24 लाख है और वहा विश्वविद्यालय है, गोरखपुर की जनसँख्या 44 लाख है और वहा दो विश्वविद्यालय है, बनारस (वाराणसी) की जनसँख्या 36 लाख है और वहा तीन विश्वविद्यालय है, इलाहाबाद की जनसँख्या 59 लाख है और वहा चार विश्वविद्यालय है। तो आजमगढ़ की जनसँख्या 46 लाख है फिर वहा विश्वविद्यालय क्यों नहीं होनी चाहिए? इस बात से तो हर कोई सहमत होता है कि आज विश्वविद्यालय बड़े-बड़े शहरों में बनाने के बजाय गरीब ग्रामीण इलाकों में बनाया जाय तो ज्यादा प्रासंगिक होगा। इस लेहाज से भी आजमगढ़ में विश्वविद्यालय बनाया जाना जरुरी है क्योंकि जनगड़ना 2011 के अनुसार आजमगढ़ में 91.5 % जनसंख्या ग्रामीण है और जनसंख्या के दृष्टिकोण से आजमगढ़ उत्तर प्रदेश का चौथा सबसे बड़ा जनपद है इस लिए यहाँ विश्वविद्यालय बनाया जाना अत्यंत जरुरी है।

तीसरा सवाल, माननीय मंत्री जी, आपने इलाहाबाद, बनारस, और गोरखपुर में विश्वविद्यालय होने की बात की है। श्रीमान जी, बता दू की आजमगढ़ से बनारस और इलाहाबाद की दूरी 100 से 200 किलोमीटर  है यहाँ पढ़ने के लिए प्रवसन करना पड़ता है। जो गरीब और अतिगरीब का बच्चा सोच भी नहीं पाता है और उसके प्रतिस्थापन में वह दिल्ली, बम्बई .... आदि जगहों पर रोजगार तलासता है जिससे वह उच्च शिक्षा से पूरी तरह बंचित हो जाता है। माननीय मंत्री जी आपके इस उत्तर से आहत होकर श्री राकेश गांधी जी ने ठीक ही कहा था कि "किसी घर को यह कहकर बिजली कनेक्टिविटी देने से मना नहीं किया जा सकता कि पड़ोसी के घर में बिजली है। अतः आप को बिजली दिया जाना औचित्यपूर्ण नहीं है।  ठीक उसी तरह आजमगढ़ की जनता की विश्वविद्यालय  की मांग को भी अनौचित्यपूर्ण नहीं कहा जा सकताI"
     उत्तर प्रदेश और विश्व बैंक के संयुक्त रिपोर्ट में यह  बताया गया था कि आजमगढ़ मंडल का शहरी इलाका उत्तर प्रदेश के सभी मंडलों से पीछे है और ग्रामीण इलाका दूसरा सबसे पीछे है। पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार ने 2006  में आजमगढ़ को भारत के 250 अत्याधिक पिछड़े जिलों में पाया था और यह उत्तर प्रदेश के 34 सबसे पिछड़े  जिलों में से एक है। जो बैकवर्ड रीजन ग्रांट फंड का हिस्सा है। भारत सरकार ने 2006 में नरेगा योजना को शुरू किया था जिसमें देश के 200 सबसे पिछड़े जिलों का चयन किया था। आजमगढ़ देश के 200 सबसे पिछड़े जिलों में एक तथा उत्तर प्रदेश के 22 सबसे पिछड़े जिलों में एक हैं। अगर यहाँ विश्वविद्यालय बनवाया गया तो आजमगढ़ का बहुमुखी विकास होगा। 

अध्यात्म हो या स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई हो या राजनीति हो या सामाजिक सरोकार का अन्य कोई भी रूप आजमगढ़ हमेशा अग्रणी रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में अस्मित्ता धूमिल होने के पीछे मुख्य कारण उच्च शिक्षण संस्थान का कमी होना है। आजमगढ़ में विश्वविद्यालय को राजनैतिक मुद्दा के रूप में भी इंटरटेन किया जाता है लेकिन वो महज भाषणों तक ही सिमित रहता है, प्रैक्टिकल का हिस्सा अभी तक नहीं हुआ है।मैं उत्तर प्रदेश सरकार से यह अपील कर रहा हूँ कि राजनीतिक आपा-धापी से ऊपर उठकर आजमगढ़ में विश्वविद्यालय की मांग को पूरा किया जाय। जो सिर्फ सर्टीफिकेट बाटने वाली संस्था न होकर विश्व स्तरीय सुविधायुक्त विश्वविद्यालय हो। 

देख अँधेरा मत घबराओ, हम दीप जलाने वाले है।
बस साथ हमारे हो लो, हम सूरज पिघलाने वाले है।


राघवेन्द्र यादव 
रिसर्च स्कॉलर 
सेंटर फॉर स्टडीज एंड रिसर्च इन इकोनॉमिक्स & प्लानिंग 
सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ गुजरात 
गांधीनगर 
गृह जनपद - आजमगढ़ 


Thursday, 17 March 2016

राजस्थान उच्च न्यायालय के सामने मनु या बाबा साहेब?

साथियों, यह (फोटो में) भवन माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय का है। इसके सामने एक प्रतिमा दिख रही है जो "मनु" की प्रतिमा है। आपको ज्ञात होगा, मनु ने एक संविधान लिखा था जिसका नाम है "मनुस्मृति"। जैसा कि आप यह भी जानते है कि हर देश का अपना एक संविधान होता है जिसके आधार पर वह देश चलता है। भारत के पास भी एक संविधान है (constitution of India) जिसे बाबा साहेब की अध्यक्षता वाली कमिटी ने लिखा था। क्या हमारा देश  मनु के संविधान "मनुस्मृति" से चलता है या बाबा साहेब की अध्यक्षता वाली कमिटी द्वारा लिखित  संविधान (constitution of India) से चलता है। अगर आपका जबाब है  बाबा साहेब की अध्यक्षता वाली कमिटी द्वारा लिखित  संविधान (constitution of India) से चलता है तो अब बात सोचने की यह है कि माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय के सामने मनु की प्रतिमा कैसे और क्यों लगी।  मैं आपसे यह पूछता हूँ कि  यहाँ पर बाबा साहेब की प्रतिमा होनी चाहिए या "मनु" की?
जय हिन्द.........

Sunday, 29 November 2015

लीजिये हाज़िर है रामदेव एण्ड  कंपनी  की  नूडल्‍स । मैं ये जानने में असमर्थ हूँ की क्या ये स्वराज फ़ूड के दायरे में आता है या नहीं ? खैर जो  भी हो ये बात  समझ  में आ ही गई होगी की नेस्‍ले की मैगी पर बैन क्यों  लगी। हाल-फ़िलहाल  हमें इंतजार  है रामदेव एण्ड  कंपनी के पेप्सी-कोला आने का ।
अभी  तक  हम कार्पोरेट से बच रहे थे अब निओ  कार्पोरेट से भी बचना है । 

आजमगढ़ में विश्वविद्यालय बनाओ अभियान


आजमगढ़ अपने अतीत में ऋषि - मुनियों की तपस्थली, स्वतंत्रता सेनानियों के धरती के रूप में रहा है, इतना ही नहीं यह कवियों, शायरों, लेखकों और विचारकों का गढ़ था और आज भी है।  ऐसे दिव्य चिंतको का एक जगह पर प्रादुर्भाव पुरे दुनिया में बहुत कम जगह मिलता है।  इतिहास का अच्छी समझ रखने वालो को  ये पता  होगा कि आजमगढ़ का इतिहास बहुत ही दिलचस्प और आदर्श  रहा है। यहाँ के कई महापुरुषों ने न सिर्फ भारत में शिक्षा का प्रसार किया बल्कि दुनिया के कई देशों में जाकर शिक्षा का प्रचार-प्रसार किया। लेकिन दुर्भाग्य की बात ये है की आज आज़ादी के लगभग सात दसक बाद भी यहाँ कोई विश्वविद्यालय नहीं है। जिससे  हर साल भारी संख्या में यहाँ के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए पलायन करना पड़ता है। सरकार से हमारी मांग है कि आजमगढ़ में यथाशीघ्र एक विश्वविद्यालय का निर्माण कराये। अगर ऐसा नहीं होता है तो यह मुहीम सड़क से विधानसभा फिर संसद की ओर अग्रसर होगा।

राघवेन्द्र यादव
आजमगढ़

Wednesday, 9 September 2015

"आजमगढ़ में विश्वविद्यालय बनाओ अभियान"

साथियों, मैं आजमगढ़ प्रशासन से यह सूचना माँगा था कि आजमगढ़ में कितने सरकारी, अर्ध सरकारी और प्राइवेट डिग्री कालेज है और उसमे प्रवेशार्थियों की संख्या कितनी है? मुझे अभी तक सिर्फ आजमगढ़ में सरकारी, अर्ध सरकारी और प्राइवेट डिग्री कालेज के आकड़े ही मिले है। प्राप्त आकड़ो के अनुसार 1 (एक) सरकारी, 10 (दस) अर्ध सरकारी और 128 (एक सौ अट्ठाइस) प्राइवेट डिग्री कालेज हैं। अर्थात आजमगढ़ में कुल 139 डिग्री कालेज हैं। ज्ञात हो कि वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल यूनिवर्सिटी जौनपुर के वेब साईट पर आजमगढ़ में कुल डिग्री कालेजों की संख्या 154 है। फ़िलहाल सच्चाई जो भी हो आप ये समझ सकते है कि आजमगढ़ की वर्तमान जनसँख्या लगभग 46 लाख से ज्यादा है। (जनगड़ना 2011 के अनुसार) और वहा एक भी यूनिवर्सिटी नहीं है। जबकि इसकी मांग वर्षों से हो रही है। आजमगढ़ में यूनिवर्सिटी को राजनैतिक मुद्दा के रूप में भी प्रयोग किया जाता है लेकिन वो महज भाषणों तक ही सिमित रहता है, प्रैक्टिकल का हिस्सा अभी तक नहीं हुआ है। वेहद दुख होता है जब कुछ तथाकथित माननीय तर्कहीन तथ्य देते हुए इस मांग को नकार देते है और कहते है कि आजमगढ़ में यूनिवर्सिटी की क्या जरुरत है? जब उसके पडोसी जनपद जौनपुर में यूनिवर्सिटी है, फैजाबाद में यूनिवर्सिटी है, गोरखपुर में यूनिवर्सिटी है, बनारस (वाराणसी) में यूनिवर्सिटी है। आजमगढ़ से डेढ़ सौ किलोमीटर दूर इलाहाबाद में यूनिवर्सिटी है। तो फिर आजमगढ़ में यूनिवर्सिटी की क्या जरुरत है? प्यारे तथाकथित माननीयों मैं तुमसे पूछ रहा हूँ। अगर जौनपुर की जनसँख्या 44 लाख है और वहा यूनिवर्सिटी है, फैजाबाद की जनसँख्या 24 लाख है और वहा यूनिवर्सिटी है, गोरखपुर की जनसँख्या 44 लाख है और वहा यूनिवर्सिटी है, बनारस (वाराणसी) की जनसँख्या 36 लाख है और वहा तीन यूनिवर्सिटी है, इलाहाबाद की जनसँख्या 59 लाख है और वहा चार यूनिवर्सिटी है। तो मैं पूछना चाहता हूँ कि आजमगढ़ की जनसँख्या 46 लाख है तो वहा यूनिवर्सिटी क्यों नहीं होनी चाहिए? साथियों हम आजमगढ़ में यूनिवर्सिटी की मांग कर रहे है इससे न सिर्फ आजमगढ़ का, न सिर्फ पूर्वांचल का, बल्कि पुरे देश का लाभ होगा। हम अपील करते है आजमगढ़ वासियों से, पूर्वांचल वासियों से, प्रदेश वासियों से और देश वासियों से की आप "आजमगढ़ में विश्वविद्यालय बनाओ अभियान" का हिस्सा बनिये, ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों को एक ''उपहार'' दिलवाने का हिस्सा बनिए। मैं पुरे विश्वास से कह रहा हूँ कि धान, गेहूँ, गन्ना, आलू.... आदि पैदा करने वाली धरती बहुत सारे अधिकारी, इंजीनियर, डाक्टर, जज, राजनेता …. आदि पैदा करेगी।
जय हिन्द जय भारत
आपका अपना
राघवेन्द्र यादव
शोधार्थी
सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी आफ गुजरात
गृह जनपद - आजमगढ़

Friday, 4 September 2015

रामदेव एण्ड कंपनी

लीजिये हाज़िर है रामदेव एण्ड  कंपनी  की  नूडल्‍स। अब ये मैगी भी बेचेंगे। मैं ये जानने में असमर्थ हूँ की क्या ये स्वराज फ़ूड के दायरे में आता है या नहीं ? खैर   जो  भी  हो   ये  बात  समझ  में आ ही गई होगी की नेस्‍ले की मैगी पर बैन क्यों  लगी। हाल-फ़िलहाल  हमें इंतजार  है रामदेव एण्ड  कंपनी के पेप्सी-कोला आने का। 


अभी  तक  हम कार्पोरेट से बच रहे  थे  अब  निओ  कार्पोरेट  से  भी  बचना    है .

Wednesday, 1 July 2015

योग और गिनीज रिकॉर्ड

अच्छा एक बात मुझे यह  समझ  में नहीं आयी कि #अंतर्राष्ट्रीय_योग_दिवस को भारत ने एड़ी-चोटी का जोर लगाकर, करोड़ों रूपये खर्च कर मनाया। इसके लिए महीनों तैयारी किया। बहुत सारे  जरुरी कामों को तिलांजलि कर योग दिवस मनाने में जुटा रहा। इसके लिए  गिनीज रिकॉर्ड्स ने दो  रिकॉर्ड की घोषणा की। पहला सबसे  ज्यादा लोग (35,985) एक साथ, एक जगह योग किये  और दूसरा सबसे ज्यादा देशों (चौरासी देश) के लोग इस आयोजन में एक साथ, एक जगह योग किये। इन दो घोषणाओं का हम सभी भारतीय सम्मान करते है। हमारा सवाल या असहमति इस बात से है कि आखिर केवल दो रिकॉर्ड ही क्यों ? इससे यह लगता है की गिनीज रिकॉर्ड्स के अधिकारियों ने इसे संकुचित रूप में देखा है जिसे और व्यापक रूप में देखे जाने की जरुरत है। मैं चाहता हूँ और गिनीज रिकॉर्ड्स के अधिकारियों से मांग करता हूँ कि इसे निम्न प्रतिमानों पर भी देखा जाना चाहिए।
) किस देश में एक साथ, एक जगह सबसे ज्यादा पुरुष योग किये?
) किस देश में एक साथ, एक जगह सबसे ज्यादा महिलायें योग की?
किस देश में एक साथ, एक जगह दूसरे देश के सबसे ज्यादा पुरुष योग किये?
) किस देश में एक साथ, एक जगह दूसरे देश की सबसे ज्यादा महिलायें योग की?
 मुझे लगता है कि अगर उपरोक्त चार प्रतिमानों पर भी गिनीज रिकॉर्ड की घोषणा की जाय तो ये  रिकॉर्ड भारत के नाम हो सकते हैं। मैं प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी से कहना चाहता हूँ कि वे अपना मौनेन्द्र वाला रूप छोड़ कर गिनीज रिकॉर्ड्स के अधिकारियों से वार्तासन करें। शायद भारत चार और रिकॉर्ड बनाने में सफल हो जाय।

राघवेन्द्र यादव
आजमगढ़, उत्तर प्रदेश