Saturday, 9 August 2014

राजनितिक नौटंकिया

सुना है किसी सीएम ने बालिका शिक्षा बढ़ाने के लिए बारहवीं पास करने वाली छात्रा को स्कूटी देगी।
हद हो गई !!!!!!!!!!!
अब इनको कौन समझाए! यहाँ स्कूल की फ़ीस देना मुस्किल है मैडम। अगर आप मुक्त शिक्षा , मुक्त अध्ययन सामग्री दे तो शिक्षा का स्तर बढ़ जायेगा। स्कूलों में शिक्षको की कमी है उनकी पूर्ति करिये। जो शिक्षक स्कूल नहीं जा रहे है उनको स्कूल भेजिए। जिन गाँवो में स्कूल नहीं है उन गाँवो में नया स्कूल का निर्माण करवाइये।  शिक्षा का स्तर स्वतः बढ़ जायेगा। ये राजनितिक नौटंकिया करने से आप समाचार की सुर्ख़ियो में भले ही रहे, शिक्षा का विकास नहीं हो सकता। फ़िलहाल उपरवाला आपके नीति निर्माताओ को सद्बुद्धि दे।



राघवेन्द्र यादव 

Wednesday, 16 July 2014

जवाहर लाल नेहरू और नरेंद्र मोदी

मुझे लगता है  जवाहर लाल  नेहरू  और नरेंद्र मोदी के आर्थिक विचारों के बीच कोई भिन्नता नहीं है क्योकि   दोनों भारी औद्योगीकरण के पक्ष में हैं. दोनों विदेशी तकनीकी के पक्ष में है।  कुछ समय पहले गुजरात में  जब नरेंद्र मोदी जी चुनावी सभा सम्बोधित कर रहे थे तो वे नेहरू जी पर कटाक्ष करते हुए कहे थे की इस देश के पहले पी एम  सरदार पटेल जी होते तो देश की दिशा कुछ अलग होती। शायद  उनका इसारा विदेशी  बड़े उद्योग की जगह देशी छोटे उद्योगो की तरफ था।  इस तथ्य से मैं सहमत भी था की सरदार पटेल जी गरीबो को ध्यान में रख कर नीतिया बनाते। वे आर्थिक ग्रोथ पर जोर न देकर आर्थिक विकास पर ज्यादा ध्यान देते। ऐसे भाषणो से मोदी जी ने लोगो को लुभाया तो जरूर लेकिन कर क्या रहे है ? किसके पद चिंन्हो पर चल रहे है नेहरू जी के या सरदार पटेल जी के। शायद नेहरू जी के।  कहा गया पटेल जी का आर्थिक सिद्धांत ? मोदी जी आप चाहे जितना विदेशियो को निवेश के लिए बुला लीजिये, चाहे जितना भारी उद्यमों को बढ़ावा दीजिये। उससे आप ग्रोथ भले ही कर लेंगे  लेकिन विकास नहीं कर पाएंगे। इसका परिणाम होगा सापेक्ष गरीबी बढ़ेगी, असमानता बढेगी, लोगो में असंतोष बढ़ेगा। आपके द्वारा लागु की जा रही नीतियों से एक गाव का एक आदमी तो हवाई जहाज से चलेगा लेकिन पूरा गाव रोज की  दो वक्त की रोटी जुटाने में पूरी जिंदगी गुजार देगा वो और कुछ नहीं कर पायेगा। इसलिए आप ग्रोथ की जगह समावेशी विकास पर ध्यान दीजिये जिससे सवा सौ करोड़ जनता का भला हो सके। सबका साथ सबका विकास केवल नारा मत दीजिये उसे धरातल पर उतारिये।

Monday, 30 June 2014

गैर जरूरी और गैर हितैसी


अभी हाल ही में बनी नई-नवेली सरकार से जनता को यह उम्मीद नहीं थी कि ये भी वही गैर जरूरी और जनता की गैर हितैसी काम करेंगे जो इसके पूर्ववर्ती सरकार ने किये थे। गैर जरुरी कार्य जैसे राज्यपालों  को बिना वजह हटाना और गैर हितैसी कार्य जैसे महगाई में बढ़ोत्तरी, रेल किराया में बढ़ोत्तरी, विदेशी पूजीपतियों को उद्योग के लिए शरण देना …… आदि आदि। देश को उम्मीद थी की सुशासन आयेगा तो देश की सरकारी मशीनरी नियमित काम करना शुरू कर देगी। लेकिन सरकार के एक महीना बीतने के बाद भी कोई बड़ा परिवर्तन देखने को नहीं मिला।  आज भी ट्रेनों के आवागमन का वही हाल है जैसे की पहले थी। हाल ही में मैं इलाहाबाद से अहमदाबाद का सफर किया था। मैं जिस ट्रेन से आया उसके पहुँचने का समय शाम के 7.10 पर था लेकिन वह 8.20 घंटे  की देरी से 3.30 पर पहुंची। आज कल ट्रेनों के लेट होने का कोई प्राकृतिक कारन भी नहीं है जैसे  घना कुहरा या अन्य समस्या।  इसे लेट होने के लिए सिर्फ सरकारी मशीनरी जिम्मेदार है। इसके अलावा रेल से जुडी एक और समस्या  जो लम्बी दुरी के लिए भी सामान्य श्रेणी में यात्रा करते है (चाहे पैसा के अभाव में या टिकट न ले पाने की वजह से) उनको डायरेक्ट प्रभावित करती है। स्टेशन पर पुलिस की मिली-भगत से कुलियों द्वारा सीट देने के नाम पर जबरदस्ती वसूली। ये समस्या मुझे दिल्ली और अहमदाबाद में कुछ ज्यादा दिखी। दिखाने के लिए तो यहाँ कैमरा से रेकार्डिंग होती है लेकिन ये महज दिखावा ही सिद्ध होता है। सरकार को चाहिए की सरकारी मशीनरी के ऊपर लगाम लगाये की इस प्रकार की समस्याएं जल्दी दूर हो जिससे लोगो को राहत मिले। अगर वर्तमान सरकार भी पूर्ववर्ती सरकार की तरह महगाई बढ़ाते रही और विदेशी निवेश को बढ़ाई तो ये जनता है सोया हुआ शेर। जिस दिन जागेगी तख्ता पलट कर देगी वे पांच साल का इंतजार नहीं करेगी।

रघु अपना