.......हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।
साथियों,
सर्व प्रथम मैं यह स्पष्ठ कर दूं कि मेरा यह राइटिंग किसी संगठन के खिलाप नहीं है। किसी विचारधारा के विरुद्ध नहीं है। मेरा प्रयास है, हुकूमते-हिन्द का ध्यान इस ओर आकृष्ट करना।
जैसा कि यह सर्वविदित है कि आजाद भारत सातवें दशक के उत्तरार्ध में है लेकिन हैरत की बात है कि आज तक हमारा संविधान पूरी तरह से जमीनी स्तर पर इम्प्लीमेंट नहीं हो पाया है। अगर मैं बात करू भारत के "केंद्रीय शैक्षणिक संस्थान " (वे चाहे यूनिवर्सिटी हो या नेशनल इंट्रेस्ट के इंस्टिट्यूशन) की तो वहाँ भी कुछ ऐसे संस्थान आज भी मिलेंगे जहाँ पर भारत सरकार की रिजर्वेशन पालिसी पूरी तरह से इम्प्लीमेंट नहीं हो पायी है। इसलिए, उच्च शैक्षणिक संस्थानों के सरकारिया-साहबजादों को इसपर विशेष ध्यान देना चाहिए।
मैं, सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ़ साउथ बिहार और इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च पुणे (IISER) का उदहारण दे रहा हूँ। <https://www.cucet2017.co.in/PDF/EligibilityCriteria/CUSBR%20Eligibility%20Criteria-CUCET2017.pdf>
<http://www.iiserpune.ac.in/admissions/int-phd-programme>
यहाँ पर एडमिशन के लिए नोटिफिकेशन आया है और ओबीसी (नान-क्रीमीलेयर) के लिए रिजर्वेशन इम्प्लीमेंट नहीं हुआ है।
मैं, आपका ध्यान भारत के राजपत्र, भाग-1, खंड-1, जो 22 दिसंबर 2011 को प्रकाशित हुआ, और भारत के राजपत्र, भाग-1, खंड-1, जो 20 अप्रैल 2008 को प्रकाशित हुआ, पर आकृष्ट करना चाहता हूँ।, जो अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, और अन्य पिछड़े वर्ग को केंद्रीय शैक्षणिक संस्थाओ में दाखिले में आरक्षण उपलब्ध कराता है। मैं, इस देश के सामजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ों की आवाज बनकर एचआरडी मंत्रालय, भारत सरकार से यह अपील करता हूँ कि भारत के संविधान की आत्मा का सम्मान करते हुए, देश के सभी केंद्रीय शैक्षणिक संस्थाओ (जो केंद्र सरकार द्वारा स्थापित, अनुरक्षित अथवा सहायता प्रदत्त है) में रिजर्वेशन लागू करवाना सुनिश्चित करें।





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